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Saturday, April 25, 2009

रामप्यारी का इशारा समझिये

आदरणिय आंटियों , अंकलों और दीदीयों पांव छूकर प्रणाम.  अब आप कहेंगे कि ये रामप्यारी को आज अचानक क्या होगया?  अचानक रामप्यारी अंगरेजी बोलते बोलते हिंदी और वो भी बिल्कुल पांव छूकर बोलने वाली हिंदी मे हिंदी बोल रही है?

 

हुआ ये कि मैं अभी सोकर भी नही ऊठी थी कि ताई ने आकर मुझे ऊठा दिया.  मैं नींदं मे ही थी. और ताई ने कहा कि रामप्यारी ऊठ ..उपर छत पर जा..और चिडियो को बाजरा डाल दिया है…उनकी रखवाली कर…कोई बदमाश बिल्ली विल्ली नही आजाये…

 

मैने नींद मे ही कहा…ऐ यू…डोंट डिस्टर्ब मी..लेट मी सलीप…

 

बस ताई का तो पारा आसमान पर चढ गया..बोली ठहर मैं दूर करती  हूं तेरी अंगरेजी  बोलने की आदत तो..और ताई ने एक हाथ से मेरा कान पकड लिया और दूसरे मे लठ्ठ ऊठा लिया..

 

मैने सोचा की बस आज तो रामप्यारी की जान गई…मैने कहा की ताई बस अबकी बार छोड दे  …

 

ताई ने पूछा -  बोल अब फ़िर बोलेगी मेरे सामने अंगरेजी?

 

मैने कहा – ताई अब आपके सामने अंगरेजी तो क्या हिंदी मे भी हिंदी नही बोलूंगी…विद्द्या माता की कसम सिर्फ़ हरयाणवी बोलूंगी..

 

अब ताई हंसते हुये बोली – रहने दे..अब इतनी शरीफ़ भी मत बन.  जा बेटा उपर जा..और चिडिया दाना चुगे तब तक उनकी रखवाली करना.. और ये गुलजार अंकल की किताब लेजा…बैठी बैठी इसको पढते रहना.

 

मैने पूछा – ये गुलजार अंकल कौन हैं?

 

ताई बोली – बस रामप्यारी तेरे को और तेरे ताऊ को तो उल्टे सीधे कामों से ही फ़ुरसत नही है. अरे कभी कवियों के बारे भी जाना करो..उनको पढा करो.  जा अब भाग जा…

 

और देख उपर जाकर सो मत जाना..सोना..अच्छी बात नही होती..इस सोने को कम करदो….समझी क्या?

 

अब मैं तो भागी उपर..तोता...कबूतर..गौरैया और दो मोर सब दाना चुग रहे थे.  कितना आनन्द आया उनको देखकर…बस मैने सोना छोड दिया और गुलजार अंकल की ये नज्म पढने लगी..आप भी पढिये.

मुझे तो बिल्कुल कबीरमय लगी.

 

 

मेरे यार जुलाहे, 

मुझको भी तरकीब बतादे कोई

अक्सर तुझको देखा है ताना-बाना बुनते

जब कोई धागा टूट गया तो और कोई सिरा जोड उसमें

आगे बुनने लगते हो

तेरे इस बाने मे लेकिन, 

इक भी गांठ-गिरह बुनकर की

देख नही सकता कोई

मैने तो इक बार बुना था एक ही रिश्ता

लेकिन उसकी सारी गिरहें साफ़ नजर आती हैं.

मेरे यार जुलाहे

मुझको भी तरकीब बतादे कोई

 

अच्छा अब नमस्ते.  कैसी लगी गुलजार अंकल की नज्म?  जरुर बताईयेगा.

4 comments:

हें प्रभु यह तेरापंथ said...

राम प्यारी तू भी यार चटकारे ले लेके क्लू देती है अम्मा यार यह गुलजार अकल कोनसे वाले है ? नये या जुने वाले?

रामप्यारी आज तेरी चर्चा ईस ब्लोग पर हुई है जाके कमेन्ट कर आ भगवान तेरा भला करेगा। निचे उक्त ब्लोग का लिन्क भेज रहा हू

इस पर क्लिक कीजिए

हें प्रभु यह तेरापंथ said...

अरे भाई कुछ तो गलती हुई तभी तो लिन्क फैल हो गया, डोन्ट वरी, आई एम हू ना ! सेन्ड यू न्यू लिन्क इस पर क्लिक कीजिए

हें प्रभु यह तेरापंथ said...

थैनक्यू! रामप्यारी, गुड बच्चे कि तरह कहना मानने के लिऐ, आई एम हेपी।
तुम्हारा क्लु तो खोपडिया मे फिट हो गऐला है। ताऊ को जवाब भी भेज दिऐला है। १००% वाला जवाब ही भेजा है।
बस रामप्यारी एक काम और कर दे ताऊ को कहकर अपनी भी लिफ्ट करा दे ना आज कि पहेलिमा।
चॉकलेट

कनिष्क कश्यप said...

welcome to the world of bloggers. Its great experience to go through sophisticated thoughts , you expressed.....
You are requested to contribute with your say on

http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/

There is lot more to reveal
Thanks and Regards
Kanishka Kashyap

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