मिस. रामप्यारी के ब्लाग पर आपका हार्दिक स्वागत है.

Saturday, May 9, 2009

रामप्यारी हिंट लेकर आगई.

रामप्यारी की रामराम.

हाय आंटीज, अंकल्ज एंड दीदी लोग..वैरी गुड एंड शक्कर जैसी  स्वीट मार्निंग फ़्रोम रामप्यारी…कैसे हैं आप लोग?  मैं कैसी हूं?….अरे मेरा क्या पूछ रहे हैं? ..वो क्या है ना रामप्यारी की  तो पांचों अंगली घी मे और सर कडाही मे.  अपने तो मजे ही मजे हैं.

 

अभी इसी साल मार्च मे होली पर  मैं ताई के साथ उसके मायके चली गई थी.  अब आप पूछेंगे कि रामप्यारी तू ताई के साथ क्युं गई थी?

 

अरे यार…आप लोग इतना भी नही जानते कि ताई अकेली कैसे जायेगी?  ना उसको ट्रेन मे बैठना आता है और ना हवाई जहाज में.  बस इसीलिये सब जगह मुझे साथ ले जाती है.  अब ये सारे काम तो मुझे ही करने पडते हैं ना.  खैर ये सब बातें कभी बाद मे बताऊंगी.

 

ताई के मायके मे मैने बहुत अच्छी २ चीजे देखीं  वहा पर ना उनके बहुत बडे बडे खेत हैं…और उसमे चने और सरसों और गेहुं के खेत खडे थे. मैने तो उन खेतों मे खूब धमाचोकडी मचाई.  वहां ताई ने मुझे डांटा भी था कि – रामप्यारी खेतों मे इस तरह उछल कुद मत कर…तेरे को लग जायेगी…

 

 

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अब ना वहां बहुत सारे बच्चे थे…अरे गांव के बच्चे नहीं…मेरे मामाओं के बच्चे….सच्ची ना…झूंठ नही नही बोलती….मेरे एक दो नही पूरे छ:  मामा हैं और सारे के सारे फ़ौजी…दो रिटायर होकर आगये….

 

एक दिन मामा ने सारे बच्चों को और मुझे ना …मुझे ना…फ़ौजियों वाली ड्रेस पहना कर,   साथ लेकर बोले – चल रामप्यारी तू यहां पहली बार आई है..तु इन खेतों मे ही घुसी रहती है.  चल तुझे हवाईजहाज दिखा कर लाता हूं.

 

मैने कहा – मामा, हवाईजहाज का क्या देखना? मैं और ताई तो उसी मे आये हैं.

 

तो मामा बोले – रामप्यारी हवाईजहाज तो वहां ऐसे ही बहुत सालों से खडा है. हमने बचपन मे वहीं पर हवाईजहाज देखा था.  उस जमाने मे देखना ही बडी बात थी, बैठने की तो क्या बात करती है?  पर वहां इससे भी  ज्यादा चीजें देखने को मिलेंगी.

 

अब हम जैसे ही वहां पहुंचे मै तो उस हवाई जहाज के पंखे पर उचक कर चढ गई.  फ़िर मामा बोले रामप्यारी जरा आराम से..कहीं चोट न लग जाये. और वहां से फ़ोटू खिंचवा कर हम भीतर गये.

 

 

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भीतर ना..एक सुरंग सी थी..उसमे उतरने के बाद ना..ऐसा लगा कि किसी कोयले की खदान मे आगये हों?  और ना…और ना…वहां पर बहुत सारे मशीनों और  ईंडस्ट्री के माडल्स भी थे.  जो सच्ची मुच्ची चलते हुये दिखाई देते थे.

 

मैने फ़ौजी मामा से पूछा  -  मामा ये सब क्या है?  तो मामा ने बताया कि रामप्यारी इसको म्युजियम कहते हैं और ये सब देखने सीखने से ज्ञान बढता है.

 

बस मैने भी खूब ज्ञान बढाया अपना और फ़िर शाम को ही हम लोग वापस मामा के फ़ार्म हाऊस पर चले गये.

 

अगले दिन ना ..हम एक मंदिर मे गये जहां माता सरस्वती की मी मुर्ति थी और उस मंदिर का नाम भी सरस्वती टेम्पल था.

 

मैने पूछा कि ये क्या होता है?  तो फ़ौजी मामा ने बताया कि इस मंदिर मे दर्शन करने से बुद्धि तेज हो जाती है.  पर रामप्यारी तेरी बुद्धि तो पहले से ही बहुत तेज है अब और ज्यादा तेज मत कर लेना.

 

फ़िर हम घर आगये और अगले दिन घर पर ही रुद्र अभिषेक करवाया गया.  वाह क्या बढिया था पंचामृत और परसाद.

 

अब ना मैं अगले साल भी ताई के साथ वहां जाऊंगी.

 

अब मैं तो खाना खाकर दो घंटे सोऊंगी.  गर्मी ज्यादा है…फ़िर अब मैं कल रिजल्ट मे आपको ताऊ के ब्लाग पर मिलूंगी.  तब तक रामप्यारी आपको नमस्ते करती है.



और एक बात चुपचाप आपके कान में बता देती हूं. आपको विद्यामाता की कसम है, किसी को और खासकर ताऊ को मत
बताना कि मैने बताया है आपको...ताई का मायका राजस्थान मे है.

16 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

बहुत बहुत धन्यवाद रामप्यारी को। मुझे तीन साल पहले की गई एक यात्रा का स्मरण हो आया।

अविनाश वाचस्पति said...

जयपुर गए थे क्‍या

संजय तिवारी said...

क्यो राम प्यारी खूब गूम रही हो ताई के साथ कभी जबलपुर भी आ जाओ

रविकांत पाण्डेय said...
This comment has been removed by the author.
अविनाश वाचस्पति said...

सांगानेर, जयपुर, जबलपुर या कोटा

Alpana Verma said...

वाह रामप्यारी !तुमने तो अपनी यात्रा का खूब वर्णन किया.अब इतना पढ़ कर तो कोई भी बिना खोजबीन किये सही जवाब दे देगा..

तुम्हारी प्लेन पर तस्वीर तो बहुत ही बढ़िया लग रही है..मान गए...तुम्हें भी सीधा पंखों पर चढ़ गयीं??
तुम ने तो पंचामृत और प्रसाद भी खाया..क्या बात है!

रंजन said...

धन्यवाद जी...

हें प्रभु यह तेरापंथ said...

यह रामप्यारी पॉयलॉट कि वेशभुषा मे क्या वहॉ पढने गई है? शायद ताई तुझे वहॉ कि स्कुल मे एडमीशन दिलाकर ही लोटेगी। वैसे एक बात कहू यहॉ तुम्हारे लिए समझो कि जगलो मे भाग-दोड करने के लिऐ वन-स्थल है । यहॉ के वनो मे एक से एक इन्टेलिजेन्ट रामप्यारीयॉ भरी हुई है। और फिर गोरव टोवर भी तो खरीदी मे जा सकती हो । सन्डे सन्डे ! नजदिक है। ऐसा कोई बिरला व्यक्ती ही कोई होगा जो रामप्यारी को सरवस्तीमाता के मन्दिर मे देख हैरान नही हुआ होगा।। आखिर ताई को लगा होगा कि रामप्यारी ताऊ के लाडप्यार मे बिगडी जा रही है। मैने ताई के इस फैसले से खुश हू कि अब रामप्यारी हॉस्टल मे रहकर पढाई करेगे। रामप्यारी मन्दिर मे सरवस्तीमाता के मन्दिर प्रसाद चढा देना मॉ कि प्रतीमा के बहार दान पेटी रखी हुई है। भुलना नही।

Mishra Pankaj said...

Puskar

Udan Tashtari said...

रामप्यारी

फोटू तो बहुत सुन्दर खिंचवा ली है हवाई जहाज के सामने.

ताऊ शादी करने हरियाणा से राजस्थान पहुँच गया? इसी हवाई जहाज से गया होगा और फिर भैंस पर बैठकर ताई के साथ वापस आ गया होगा, तब से हवाई जहाज वहीं खड़ा है.

सही जबाब: यह शहर ताई का मायका है.

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said...

रामप्यारी घणी ऊत्त हो गी.....औठै जहाज पै चढ कै के "झुंझने" बजाण लाग री है....ऊपर तै डैह पडेगी, तावली तै उतर आ..... नहीं तो ताऊ तै कह कै तेरे तै डांट "पिलानी" पडेगी.

रविकांत पाण्डेय said...

हिंट वाली फोटो तो BITS पिलानी की है।

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

pata nahin kahan kahan pahunch jaati hai raampyari

mehek said...

rampyari bahut ghumakkadi ki tune tai ji ke gaon:),bahut dino e tujh se mulakat hi nahi huyi,soch tujhe namsate karti chalu.:):)garmi mein icecream khao aur thandak paao.

समयचक्र said...

रामप्यारी जी के क्या कहने...सब ...चकाचक.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

अरे वाह रामप्यारी आपका ब्लोग और तस्वीरेँ बहुत पसँद आये :)

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