रामप्यारी की रामराम.
हाय आंटीज, अंकल्ज एंड दीदी लोग..वैरी गुड एंड शक्कर जैसी स्वीट स्वीट वार्म मार्निंग फ़्राम रामप्यारी…कैसे हैं आप लोग? ये ल्लो..मैं भी क्या पगला गई हूं?..जब आप लोग यहां रामप्यारी के ठीये तक आ ही गये हैं तो अच्छे ही होंगे ना? कोई बीमार तो रामप्यारी के ठीये तक कैसे आयेगा?
और हां अंकल आंटियों और दादीयों…आप ना ..आप ना…हिंट तो मुझसे लेते हैं और मुझे यहां थैंक्यु भी बोल कर नही जाते. अब आप इतने बडे हैं ..मैं आपको क्या समझाऊं कि थैंक्यु तो कहना ही चाहिये कि – रामप्यारी..तूने हिंट दिया..तेरा थैंक्यु..पर नही आप तो सीधे भाग लेते हो?
देखना..कभी रामप्यारी का दिमाग घूम गया तो हिंट ऐसा देगी कि आपको हिमाचल से सीधे कन्याकुमारी पहुंचा देगी. हां नही तो क्या?
अरे यार हीरामन भैया..आप क्यो चिल्ला रहे हो? अरे आई ..आई….बस सबको रामप्यारी ही दिखती है..कुछ भी काम हो…अब हिंट देना है तो रामप्यारी देगी…ताऊ तो आराम से बैठ कर चुनाव नतीजे सुनने मे लगे हैं.
ताई को कुछ काम हो तो रामप्यारी..रामप्यारी…और अब ये हीरामन भैया…अब एक अकेली जान ..रामप्यारी ..क्या क्या करे? हां अब बोलो हीरामन भैया..आपको क्या तकलीफ़ है? क्युं चिल्ला रहे हो?
अब हीरामन भैया बोले – रामप्यारी..देख आज तेरा भविष्य मुझे खराब दिखाई पड रहा है…मैने पूछा कि ऐसे क्या पत्थर पड गये मेरे भविष्य मे? और मैने कौन सा पाप कर दिया?
हीरामन भैया बोले – देखो उपर तुमने दीदीयों को दादीयों लिख दिया है और आज तेरी डाक्टर पूजा दीदी और लवली दीदी दोनों ही तेरी आरती उतारेंगी.
अरे बाप रे…सारी. वैरी वैरी सारी….दीदीयों..माफ़ करना प्लिज…जरा जल्दी मे मेरी जबान फ़िसल गई थी. अब आप तो जानती ही हो कि मैं कोई जान बूझकर ऐसा थोडी बोल सकती हूं.
हां तो मैं पिछले साल ताऊ और ताई के साथ घूंमने गई थी…वहां पर हमारा होटल..बिल्कुल नदी के किनारे ही था. और वहीं से इस जगह हम पैदल ही चढ गये थे. और उपर ना….वहां मेला जैसा लगा हुआ था…चकरी वाला झूला और भी पता नही क्या क्या…मैने तो खूब आनन्द लिये. और बहुत भीड थी वहां पर.
और ताऊ और ताई तो वहां पर ना…वहां की लोकल ड्रेस पहन कर फ़ोटो खिंचवा रहे थे. अब मैं वो फ़ोटो आपको तो नही दिखा सकती ना..वर्ना मेरी पिटाई होने की संभावना बढ जायेगी.

यहां रामप्यारी को ढूंढिये
आप तो ये वाली फ़ोटो देखो और मुझे ढूंढो इसमे. और इस जगह बहुत सारे पेड भी थे. और मंदिर का दरवाजा थोडा छोटा था. मैं तो फ़ट से घुस गई थी पर ताऊ को थोडी तकलीफ़ हुई थी.
और एक बात बताऊं? किसी से कहना मत..ताऊ ना…ताऊ ना…अहले तो ४थी क्लास मे फ़ेल हुआ…फ़िर ना..फ़िर ना…फ़िर ना ११ वीं मे फ़ेल होगया..और उसके बाद १७ वीं क्लास मे फ़ेल होगया…और मुझको कहता है- रामप्यारी तू कितनी बडी डफ़र है…दुसरी क्लास मे दो दो बार फ़ेल हो चुकी है?
अब बोलो डफ़र मैं हूं या ताऊ? अरे मैं तो दूसरी क्लास मे ही फ़ेल होती हूं..तुम तो १७ वीं मे फ़ेल होते हो? तो कौन बडा डफ़र है? जो बडी क्लास में फ़ेल होता है वो बडा डफ़र होगा ना. सीधी सी तो बात है.
अरे अब आप ये पूछना चाहते हैं ना कि रामप्यारी – ये १७ वीं क्लास कौन सी होती है? अरे अब आप समझा करो..ताऊ और रामप्यारी के यहां कुछ भी हो सकता है.
हां जब हम वहां गये थे ना तब बहुत भयानक वाली गर्मी थी. जैसी आजकल है. रास्ते मे हम ताई के मायके मे भी रुके थे. मुझे याद आरहा है. और एक जगह ना हमारी कार गर्म हो गई थी..अब उस जमाने की कारें आज जैसी तो होती नही थी.
कार चलाने वाला ताऊ और फ़िर ताऊ थक जाता तो ताई चला लेती थी. हां एक बात ये दोनों और कोई काम ढंग का करें या ना करें ..पर ये दोनों कार चलाने का काम बहुत बढिया कर लेते हैं. मैं तो इनके साथ साथ करीब करीब पूरा भारत कार से घूम चुकी हूं...

तपती दोपहर पिलानी से बाहर एक गांव में
रास्ते मे पिलानी से निकलते ही एक जगह हमको कुछ ऊंट और उनके बच्चे एक पेड के नीचे बैठे दिख गये बस मैने जिद्द की कि मुझे तो ऊंटो के बच्चों से बात करनी है. .वहां कार भी भयानक गर्मी मे गर्म हो चुकी थी. बस ताई ने वहीं कार रोक दी और वहीं कार को तो बोनट खोल कर खडा किया..और हम भी वहीं रुक गये. ….अब आप फ़ोटो मे किसको पहचान रहे हैं? …पर आप इसमे रामप्यारी को ढूंढ कर बताओ तो जानूं?
और मैने तय कर लिया है कि मैं अब अपने ब्लाग पर नियमित लिखूंगी और ये सब ताऊ और ताई के साथ की गई मेरी यात्राओं के बारे मे होगा? क्या खयाल है आपका? रामप्यारी का ये आईडिया कैसा लगा आपको?